डार्क वेब

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Rocket clouds
डार्क वेब by Mind Map: डार्क वेब

1. परिचय

1.1. इंटरनेट पर मौजूद ऐसी वेबसाइट्स जो गूगल, बिंग जैसे सर्च इंजनों और सामान्य ब्राउज़िंग के दायरे से बाहर होती हैं डार्क नेट/डार्क वेब कहलाती हैं।

1.2. यह केवल TOR (The Onion Router), या I2P (Invisible Internet Project) जैसे विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग करने वाली इंटरनेट की एक परत है।

1.3. सामान्य वेबसाइट्स के विपरीत ये ऐसे नेटवर्क हैं जिन तक लोगों के चुनिंदा समूहों की ही पहुँच होती है और केवल विशेष ऑथराइज़ेशन प्रक्रिया, विशिष्ट सॉफ़्टवेयर व विन्यास (Configuration) के माध्यम से ही इन तक पहुँचा जा सकता है।

1.4. इसमें शैक्षणिक डेटाबेस और कार्पोरेट साइट्स जैसे सामान्य क्षेत्रों के साथ ही काला बाज़ार, फेटिश समुदाय (Fetish Community) एवं हैकिंग व पायरेसी जैसे गूढ़ क्षेत्र भी शामिल हैं।

2. प्रकार

2.1. डीप वेब तक केवल सर्च इंजन से प्राप्त परिणामों की सहायता से नहीं पहुँचा जा सकता है।

2.2. डीप वेब वर्ड वाइड वेब (World Wide Web) का वह भाग है जो गूगल जैसे सर्च इंजन द्वारा अनुक्रमित नहीं होता है। यह आकार में सतही वेब से लगभग 500 से 600 गुना बड़ा है।

2.3. डीप वेब के किसी डॉक्यूमेंट तक पहुँचने के लिये यूज़र नेम और पासवर्ड के द्वारा उसके URL एड्रेस पर जाकर लॉग-इन करना होता है।

2.4. जीमेल अकाउंट, ब्लॉगिंग वेबसाइट, सरकारी प्रकाशन, अकादमिक डेटाबेस, वैज्ञानिक अनुसंधान आदि ऐसी ही वेबसाइट्स होती हैं जो अपने प्रकृति में वैधानिक हैं किंतु इन तक पहुँच के लिये एडमिन की अनुमति आवश्यकता होती है।

3. डार्क नेट की उपयोगिता

4. चिंताएँ

5. आगे की राह